Wednesday, March 27, 2019 "नए तंबाकू" से होने वाली लाखों मौतों की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले 25 उपाय
लेख

वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है। हम सदियों से स्मॉग की समस्या से जूझ रहे हैं, 19 वीं सदी में लंदन की कुख्यात “पी सूपर” स्मॉग से लेकर आज के समय में बीजिंग और दिल्ली जैसे शहरों में फैली धुंध, हमेशा से हमारी चिंता का विषय रही है। हालांकि, नई बात यह है कि, आज हम अपने स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक हो रहे हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से हर साल लगभग सत्तर लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। लेकिन प्रदूषित हवा केवल मृत्यु के लिए ही जिम्मेदार नहीं है। 2018 में किए गए शोधों में, समाज के निचले तबके में पाए गए डायबिटीज के लाखों मामलों का वायु प्रदूषण से सीधा संबंध पाया गया था। तो हम कह सकते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्रेसस ने वायु प्रदूषण को "नया तंबाकू" कहकर कोई कोई गलत बात नहीं की है।

लेकिन यह बुरी ख़बर हमें इसके समाधान की दिशा में कार्य करने की प्रेरणा भी देती है। 2018 में संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम व अन्य लोगों के सहयोग से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य विषय पर पहला वैश्विक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें सहभागियों ने 2030 तक वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों को दो तिहाई तक कम करने का संकल्प लिया। इस बैठक में, संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, एशिया पैसिफिक क्लीन एयर पार्टनरशिप (APCAP) और क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (CCAC) ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र हेतु 25 समाधानों की शुरूआत की।

एशिया-प्रशांत में वायु प्रदूषण: विज्ञान-आधारित समाधान के अंतर्गत उद्योग से लेकर कृषि तक हर चीज को शामिल करते हुए 25 नीतिगत और तकनीकी उपाय सुझाए गए हैं। इन सभी उपायों को अपनाकर लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है और 2030 तक एक अरब से अधिक लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा उपलब्‍ध कराई जा सकती है। यह काम उस क्षेत्र में पहले ही शुरू हो चुका है जहां चार अरब लोग - 92 प्रतिशत आबादी-वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तरों के बीच जीवनयापन कर रहे हैं।

आइये, इन 25 उपायों में से एक उपाय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बारे में चर्चा करते हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के सहयोग से फिलीपींस और श्रीलंका ने पारंपरिक वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को वरीयता देना शुरू कर दिया है, और इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। श्रीलंका में वाहनों के सक्रिय बेड़े में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों की संख्या 2013 से 2018 के बीच तक 10 गुना बढ़ गई है, अब यहां ऐसे 150,000 वाहन चल रहे हैं। सक्रिय बेड़े में कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों में 2013 में 4 प्रतिशत वृद्धि हुई जो 2018 के मध्य तक 23 प्रतिशत तक पहुंच गई। पिछले शोधों के अनुसार राजधानी कोलंबो में, 50 प्रतिशत से अधिक वायु प्रदूषण ट्रैफिक के कारण होना सामने आया था, ऐसे में वर्तमान पहल मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक सकारात्मक साबित हो सकती है।

श्रीलंका सरकार के सस्टेनेबल डेवलपमेंट काउंसिल के महानिदेशक सुगाथ यलेगामा ने कहा कि "हम कम प्रदूषण फैलाने वाले और अधिक अनुकूल ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के महत्व को स्वीकार करते हैं, और इस दिशा में मिले संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के समर्थन का स्वागत करते हैं, अधिक व्यापक वाहन उत्पाद शुल्क के कारण, अब हमारी सड़कों पर हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में बढोतरी हुई है।"

यह तो केवल एक उदाहरण है। सभी 25 उपायों को पूरी तरह से लागू करके 2015 की तुलना में 2030 तक पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में महीन सूक्ष्म कणीय प्रदूषण को 56 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

लेकिन वायु प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है। उदाहरण के लिए, 22 लैटिन अमेरिकी शहरों में बसों और टैक्सियों के वर्तमान बेड़े में बदलाव करके 2030 तक 36,500 लोगों की जान बचाई जा सकती है। यही कारण है कि संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, अपने मूव मंच (MOVE platform) और यूरोक्लिमा+ के साथ मिलकर, अर्जेंटीना, कोलंबिया और पनामा की राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रणनीतियों के अनुपालन में मदद कर रहा है, और चिली और कोस्टारिका को इलेक्ट्रिक बसों का उपयोग बढ़ाने के लिए सहयोग कर रहा है।

लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन समन्‍वयक (क्लाइमेट चेंज कोर्डिनेटर), गुस्तावो माणेज (Gustavo Mañez) कहते हैं, "लैटिन अमेरिका में दुनिया में सबसे अधिक हरित ट्रांसपोर्ट मैट्रिक्स है, परिवहन क्षेत्र में प्रदूषकों का उत्सर्जन सबसे अधिक बढ़ रहा है और यहां पर प्रति व्यक्ति सार्वजनिक परिवहन उपयोग सबसे अधिक है, इस प्रकार से यह क्षेत्र इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का लाभ उठाने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है।"

दुनिया भर में इस बारे में बहुत कुछ हो रहा है। क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोलिएशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा चलाया जा रहा अभियान, ब्रीथ लाइफ, 52 शहरों, क्षेत्रों और देशों को कवर करते हुए 15 करोड़ 30 लाख से अधिक नागरिकों तक पहुंच रहा है। उदाहरण के लिए, अभियान के साझेदारों ने एक खेल चुनौती के माध्यम से जनता में उत्साह का संचार किया है, जिसके कारण 55,000 लोगों ने साइकिल से या पैदल चलने का संकल्प लिया है। अब यूरोप में दस लाख से अधिक इलेक्ट्रिक कारें हैं। नए नवीकरणीय उर्जा स्रोतों में निवेश के साथ नवीकरणीय उर्जा के उपयोग में बढोतरी से हर साल जीवाश्म ईंधन में निवेश को कम किया जा सकेगा।

इन सभी कामों के नतीजे देखने को मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2018 में पाया कि अमेरिका के 57 प्रतिशत से अधिक शहरों और यूरोप के 61 प्रतिशत से अधिक शहरों में 2010 से 2016 के बीच कणीय प्रदूषकों के स्तरों में कमी आई है। मंजिल अभी बहुत दूर है, लेकिन सभी नवीन वैज्ञानिक समाधानों के साथ, संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और इसके साझेदार इस अदृश्य हत्यारे के ख़तरे को ख़त्म करने के लिए पहले से कहीं ज्यादा जोर लगा रहे हैं।

वायु प्रदूषण तथा रसायन और कचरे पर हमारे कामों के बारे में और अधिक जानें।

यह लेख संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कामों को उजागर करने वाले लेखों की श्रृंखला का हिस्सा है और 2018 की वार्षिक रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है।

 

 

 

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