Monday, January 28, 2019 भारत में डीज़ल से स्याही बनाना
लेख

चक्र इनोवेशन के संस्थापक अर्पित धूपर के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए यंग चैंपियंस ऑफ द अर्थ का खिताब जीतने के बाद उनका स्टार्ट-अप कहीं आगे बढ़ चुका है। चक्र इनोवेशन डीज़ल इंजनों से निकलने वाले गंदे प्रदूषकों (पार्टिक्युलेट मैटर) का एकत्रण करता है और इसे स्याही में बदल देता है।

भारत में पावर बैक-अप के लिए बड़े पैमाने पर डीज़ल जनरेटर का उपयोग किया जाता है, यह जनरेटर बिना जला डीज़ल और कालिख उत्सर्जित करता है। जिन क्षेत्रों में विद्युत ग्रिड मौजूद नहीं होती है, वहाँ डीज़ल जनरेटर ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है, और इसका एक दिन में औसतन 8 घंटे उपयोग किया जाता है।

चक्र इनोवेशन का उद्देश्य दिल्ली में डीज़ल जनरेटर उत्सर्जन के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को कम करना है। इस तरह के उत्सर्जन से कणीय प्रदूषकों (पार्टिक्युलेट मैटर) का घनत्व 300 माइक्रोग्राम/क्यूबिक-मीटर तक बढ़ जाता है। इतने उच्च स्तरों पर, यह कालिख मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाती है: विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षा सीमा 23 माइक्रोग्राम/क्यूबिक-मीटर है।

धूपर ने बताया कि "यह कालिख इतनी बारीक होती है कि हमारा नाक और फेफड़े इसे फिल्टर नहीं कर पाते, और यह सीधे हमारे रक्त प्रवाह में चली जाती है।

“यह मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। हमने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो इंजन की क्षमता पर कोई नकारात्मक प्रभाव डाले बिना, इस कालिख को वातावरण में मिलने से पहले ही कैद कर लेती है। इंडस्ट्री में ऐसा पहली बार हुआ है।”

वस्तुतः प्रदूषण द्वारा मुद्रण हो रहा है, चक्र इनोवेशन कालिख को स्याही में परिवर्तित कर रहा है। कंपनी द्वारा बनाए उपकरण को चक्र शील्ड के नाम से जाना जाता है जो कालिख के कणों को तरल रूप में निलंबित करके उन्हें कैद कर लेता है, जिससे कालिख के छोटे-छोटे कण हवा में नहीं मिल पाते।

कालिख के कणों, भारी धातुओं और हानिकारक पदार्थों को अलग करने के बाद, इसमें से रंजक निकाल लिया जाता है और स्याही बनाने के लिए इसे एक बाइंडर पर चढ़ा दिया जाता है।

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प्रदूषण के साथ पेंटिंग और कालिख से बनी स्याही। फोटो द्वारा: चक्र शील्ड

 

कंपनी ने अब तक 60 से अधिक उपकरणों की बिक्री की है, जिसमें 18 विभिन्न बड़े उद्योगों द्वारा खरीदे गए हैं। पहले उपकरण की स्थापना अमेरिकी टॉवर कॉर्परेशन में हुई थी, और सबसे बड़ा उपकरण एक तेल और गैस कंपनी में लगाया गया, जहां एक उंची इमारत पर इस उपकरण को स्थापित करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

चक्र के नियमित ग्राहकों में डेल/Dell भी शामिल है - यह अपने उत्पादों के डब्बों पर प्रिंट करने के लिए कालिख स्याही का उपयोग कर रहा है - जो कि कणीय प्रदूषण से होने वाली लाखों वार्षिक मौतों को कम करने की दिशा में एक छोटा कदम है। इसके अलावा टाटा समूह भी अपने समग्र पर्यावरण पदचिह्न को कम करने के लिए चक्र की तकनीक का उपयोग कर रहा है।

धूपर ने अनुसार, “स्याही एक सकारात्मक सह-उत्पाद है और इसकी सार्थकता के बारे में कोई संदेह नहीं है, लेकिन यह हमारी मुख्य समस्या का समाधान नहीं है। दुनिया में स्याही की कोई कमी नहीं है। हम जिस समस्या को हल कर रहे हैं, वह प्रदूषण को कम कर रही है: यह हमारे व्यापार मॉडल का प्रमुख बिंदु है,”

उन्होंने कहा, "यह कालिख बहुत बारीक होती है, जो कि बाल के व्यास से भी लगभग 1,000 गुणा बारीक है। हम जो कार्बन एकत्र कर रहे हैं, उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल काफी ज्यादा होता है और इसका उपयोग पानी को शुद्ध करने के लिए किया जा सकता है। तो फिर हम जल प्रदूषण से निपटने के लिए वायु प्रदूषण का उपयोग करेंगे! लेकिन ये प्रयोग अभी भी अपने शुरुआती चरणों में हैं।”

“हम खुद को उत्पादन कंपनी की बजाय एक नवाचार कंपनी के रूप में देखते हैं। भविष्य में, हम चिमनी, बॉयलरों, भस्मकों (इन्सिनिरेटर्स) और जहाजों से वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नवाचारों पर काम करेंगे - इसलिए हमें नए आविष्कार करते रहना होगा।”

हम उन सभी लोगों का आह्वान करते हैं जो पृथ्वी के लिए कुछ करना चाहते हैं, क्या आपमें यंग चैंपियन्स ऑफ अर्थ बनने की क्षमता है। इसके लिए आवेदन पोर्टल जल्द ही शुरू होने वाला है - अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट देखते रहें! यंग चैंपियन्स ऑफ अर्थ प्राइज़ कोवेस्ट्रो द्वारा प्रायोजित है।

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